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दीपावली, प्रकाश पर्व

दिवाली 2026 की तिथि: रविवार, 8 नवंबर 2026

दिवाली 2026 रविवार, 8 नवंबर 2026 को है, अमावस्या (कृष्ण पक्ष), कार्तिक (पूर्णिमान्त) · आश्विन (अमान्त)।

अद्यतन: 4 अक्टू॰ 2026 · तिथियाँ नई दिल्ली के लिए

मुख्य तथ्य

तिथि (दिनांक)
रविवार, 8 नवंबर 2026
हिंदू तिथि
अमावस्या (कृष्ण पक्ष)
कार्तिक (पूर्णिमान्त) · आश्विन (अमान्त)
तिथि आरंभ / समाप्त
11:28 AM → 12:32 PM, 9 नव॰
प्रदोष काल
5:31 PM – 7:55 PM
सूर्योदय · सूर्यास्त (नई दिल्ली)
6:38 AM · 5:31 PM
विक्रम संवत्
2083 (गुजराती: 2082)

तिथियाँ

वर्षतारीखहिंदू तिथि
2026रविवार, 8 नवंबर 2026अमावस्या (कृष्ण पक्ष)कैलेंडर में देखें
2027शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2027अमावस्या (कृष्ण पक्ष)कैलेंडर में देखें

तिथियाँ नई दिल्ली के लिए हैं। बीत चुकी तारीखें नहीं दी गई हैं। आगे के वर्ष जाँच के बाद जोड़े जाएँगे।

दिवाली के बारे में

दिवाली या दीपावली प्रकाश का पर्व है और सबसे व्यापक रूप से मनाया जाने वाला हिंदू त्योहार है। इसका मुख्य दिन पूर्णिमान्त पंचांग में कार्तिक मास की अमावस्या (अमान्त में आश्विन) को पड़ता है और यह धनतेरस से शुरू होने वाले पाँच दिवसीय उत्सव का केंद्र है। घरों की सफ़ाई कर दीप जलाए जाते हैं और परिवार धन-समृद्धि की देवी लक्ष्मी के साथ गणेश जी का पूजन करते हैं।

अलग-अलग क्षेत्रों में इसकी कथा अलग है। कई लोग राम के अयोध्या लौटने को याद करते हैं, कुछ कृष्ण द्वारा नरकासुर के वध को, और अनेक व्यापारिक समुदायों के लिए यह नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत है।

तिथि कैसे तय होती है

दिवाली उस अमावस्या को मनाई जाती है जो प्रदोष काल, यानी सूर्यास्त से शुरू होने वाली अवधि में हो। जब अमावस्या लगातार दो दिनों की संध्या को रहे तो सभी पंचांग एकमत नहीं होते; यह कैलेंडर उस दिन को लेता है जब वह सूर्योदय पर भी हो। सूर्यास्त का समय अलग होने से शहरों के बीच भी तिथि में एक दिन का अंतर आ सकता है।

कैसे मनाया जाता है

पूजा विधि

  1. घर और पूजा स्थल साफ़ करें, द्वार पर रंगोली बनाएँ और लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएँ।
  2. चौकी पर गणेश और लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र रखें, पास में जल, आम के पत्ते और नारियल वाला कलश रखें।
  3. ऊपर दिए प्रदोष काल में घी का बड़ा दीपक जलाएँ जो रात भर जले, और गणेश से आरंभ करें: गंगाजल छिड़कें, रोली, अक्षत और फूल चढ़ाएँ।
  4. लक्ष्मी जी को कुमकुम, फूल (मिले तो कमल), मिठाई, खील-बताशे और सिक्के अर्पित करें, और लक्ष्मी मंत्र या श्री सूक्त का पाठ करें।
  5. व्यापारी परिवार नई बहियों, कलम और तिजोरी की भी पूजा करते हैं (चोपड़ा या बही-खाता पूजन)।
  6. गणेश और लक्ष्मी की आरती गाएँ, फिर पूजा-घर से शुरू करके पूरे घर में दीये जलाएँ और प्रसाद बाँटें।

पूजा सामग्री सूची

सामान जुटाते हुए टिक करें; आपकी सूची इसी डिवाइस पर रहती है।

कथा: दीपावली की कथा

चौदह वर्ष के वनवास और रावण-वध के बाद कार्तिक की अमावस्या की रात श्रीराम सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे। प्रजा ने उनके स्वागत में हर गली में दीयों की पंक्तियाँ जलाईं, और तभी से दीपावली दीयों से मनाई जाती है।

इसी रात को समुद्र-मंथन से लक्ष्मी जी के प्रकट होने और विष्णु जी का वरण करने की रात भी माना जाता है, इसीलिए दीपावली पर लक्ष्मी पूजन होता है और उनके स्वागत में घर साफ़ करके रोशन किए जाते हैं।

आरती: जय गणेश देवा

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥ एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी। माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥ जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा॥ पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा। लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥ जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा॥ अंधन को आँख देत, कोढ़िन को काया। बाँझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥ जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा॥ 'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा। माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥ जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा॥

पारंपरिक गणेश आरती, जो पूजा में हर दूसरी आरती से पहले गाई जाती है। शब्द परिवारों में थोड़े अलग हो सकते हैं।

आरती: ॐ जय लक्ष्मी माता

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥ उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता। सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥ दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता। जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥ तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता। कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥ जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता। सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥ तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता। खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥ शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता। रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥ महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता। उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता॥

दीपावली की रात और हर लक्ष्मी पूजा में गाई जाने वाली लक्ष्मी आरती। शब्द परिवारों में थोड़े अलग हो सकते हैं।

अन्य शहरों में दिवाली 2026

शहरतारीखनई दिल्ली से तुलना
नई दिल्लीरविवार, 8 नवंबर 2026नई दिल्ली जैसी ही
लंदनरविवार, 8 नवंबर 2026नई दिल्ली जैसी ही
न्यूयॉर्करविवार, 8 नवंबर 2026नई दिल्ली जैसी ही
टोरंटोरविवार, 8 नवंबर 2026नई दिल्ली जैसी ही
सिडनीरविवार, 8 नवंबर 2026नई दिल्ली जैसी ही
दुबईरविवार, 8 नवंबर 2026नई दिल्ली जैसी ही
सिंगापुररविवार, 8 नवंबर 2026नई दिल्ली जैसी ही
जोहान्सबर्गरविवार, 8 नवंबर 2026नई दिल्ली जैसी ही
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिवाली 2026 में कब है?

दिवाली 2026 रविवार, 8 नवंबर 2026 को है (नई दिल्ली)। तिथि 11:28 AM से 12:32 PM, 9 नव॰ तक रहती है।

दिवाली 2027 में कब है?

दिवाली 2027 शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2027 को है (नई दिल्ली)।

दिवाली की तारीख हर वर्ष क्यों बदलती है?

दिवाली हिंदू चंद्र-सौर पंचांग पर आधारित है। यह कार्तिक (पूर्णिमान्त) · आश्विन (अमान्त) की अमावस्या (कृष्ण पक्ष) से जुड़ा है, किसी निश्चित अंग्रेज़ी तारीख से नहीं। चंद्र वर्ष सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटा होता है, इसलिए तारीख हर वर्ष लगभग इतनी पहले खिसकती है, जब तक अधिक मास जोड़कर वह वापस आगे नहीं कूदती।

दिवाली क्या हर जगह एक ही दिन होता है?

जाँचे गए शहरों (नई दिल्ली, लंदन, न्यूयॉर्क, टोरंटो, सिडनी, दुबई, सिंगापुर, जोहान्सबर्ग) में तारीख एक ही है। अन्य स्थानों पर फिर भी अंतर हो सकता है, क्योंकि तिथियाँ स्थानीय सूर्योदय या सूर्यास्त पर देखी जाती हैं।

कैलेंडर में देखें। विक्रम संवत् कैलेंडर में नवंबर 2026 देखें और अपने सूर्योदय के अनुसार तारीख पाने के लिए शहर बदलें।

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