मुख्य तथ्य
- तिथि (दिनांक)
- बुधवार, 25 अगस्त 2027
- हिंदू तिथि
- कृष्ण पक्ष अष्टमी
भाद्रपद (पूर्णिमान्त) · श्रावण (अमान्त) - तिथि आरंभ / समाप्त
- 8:25 PM, 24 अग॰ → 7:21 PM
- सूर्योदय पर तिथि
- 5:55 AM
- सूर्योदय · सूर्यास्त (नई दिल्ली)
- 5:55 AM · 6:51 PM
- विक्रम संवत्
- 2084 (गुजराती: 2083)
तिथियाँ
| वर्ष | तारीख | हिंदू तिथि | |
|---|---|---|---|
| 2027 | बुधवार, 25 अगस्त 2027 | कृष्ण पक्ष अष्टमी | कैलेंडर में देखें |
तिथियाँ नई दिल्ली के लिए हैं। बीत चुकी तारीखें नहीं दी गई हैं। आगे के वर्ष जाँच के बाद जोड़े जाएँगे।
कृष्ण जन्माष्टमी के बारे में
जन्माष्टमी कृष्ण के जन्म का पर्व है, जो अमान्त पंचांग में श्रावण और पूर्णिमान्त में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है। भक्त दिनभर व्रत रखते हैं और उनके जन्म के पारंपरिक समय, मध्यरात्रि तक जागरण करते हैं।
मथुरा और वृंदावन में मंदिर कई दिन पहले से सजते हैं, महाराष्ट्र में दही हांडी फोड़ने के लिए मानव पिरामिड बनते हैं और कई घरों में कृष्ण की बाल-लीलाओं की झाँकियाँ सजाई जाती हैं।
तिथि कैसे तय होती है
अधिकांश पंचांग जन्माष्टमी को उस दिन रखते हैं जब सूर्योदय पर अष्टमी हो (उदया अष्टमी)। कुछ स्मार्त परंपराएँ उस दिन को लेती हैं जब अष्टमी मध्यरात्रि में हो, इसलिए कुछ समुदाय एक दिन के अंतर से मनाते हैं। अपने परिवार की परंपरा देख लें।
कैसे मनाया जाता है
- दिन में व्रत रखें और मध्यरात्रि के जन्मोत्सव के बाद, या परंपरा के अनुसार अगले दिन सूर्योदय पर पारण करें।
- भजन गाएँ, भागवत पढ़ें और बाल कृष्ण के लिए छोटा पालना सजाएँ।
- मंदिर जाएँ; मथुरा, वृंदावन और द्वारका के उत्सव सबसे प्रसिद्ध हैं।
पूजा विधि
- दिन भर व्रत रखें, निर्जला या फलाहार, जैसा परिवार में होता है।
- लड्डू गोपाल के लिए झूला फूलों और कपड़े से सजाएँ।
- आधी रात (निशीथ काल) में मूर्ति को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर) से, फिर स्वच्छ जल से स्नान कराएँ।
- नए वस्त्र और आभूषण पहनाएँ, मोर-पंख का मुकुट और बाँसुरी सजाएँ।
- माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी, तुलसी दल और फल का भोग लगाएँ।
- झूला झुलाएँ, भजन और आरती गाएँ, और जन्मोत्सव मनाएँ।
- परंपरा के अनुसार आधी रात के बाद या अगली सुबह व्रत का पारण करें।
पूजा सामग्री सूची
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कथा: श्रीकृष्ण का जन्म
आकाशवाणी ने मथुरा के राजा कंस को बताया कि उसकी बहन देवकी की आठवीं संतान उसका वध करेगी। उसने देवकी और उनके पति वसुदेव को कारागार में डाल दिया और उनकी हर संतान को मार डाला।
आठवीं संतान श्रीकृष्ण भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की आधी रात को रोहिणी नक्षत्र में जन्मे। पहरेदार सो गए, बेड़ियाँ खुल गईं, और वसुदेव तूफ़ान में यमुना पार करके शिशु को गोकुल ले गए, उन्हें यशोदा और नंद के पास छोड़कर उनकी नवजात कन्या को ले आए। जब कंस ने उस कन्या को मारना चाहा, तो वह देवी योगमाया बनकर उसके हाथों से छूट गई और चेतावनी दी कि उसका वध करने वाला जीवित है।
आरती: आरती कुंजबिहारी की
जन्माष्टमी की आधी रात को गाई जाने वाली कृष्ण आरती। शब्द परिवारों में थोड़े अलग हो सकते हैं।
अन्य शहरों में कृष्ण जन्माष्टमी 2027
| शहर | तारीख | नई दिल्ली से तुलना |
|---|---|---|
| नई दिल्ली | बुधवार, 25 अगस्त 2027 | नई दिल्ली जैसी ही |
| लंदन | बुधवार, 25 अगस्त 2027 | नई दिल्ली जैसी ही |
| न्यूयॉर्क | बुधवार, 25 अगस्त 2027 | नई दिल्ली जैसी ही |
| टोरंटो | बुधवार, 25 अगस्त 2027 | नई दिल्ली जैसी ही |
| सिडनी | बुधवार, 25 अगस्त 2027 | नई दिल्ली जैसी ही |
| दुबई | बुधवार, 25 अगस्त 2027 | नई दिल्ली जैसी ही |
| सिंगापुर | बुधवार, 25 अगस्त 2027 | नई दिल्ली जैसी ही |
| जोहान्सबर्ग | बुधवार, 25 अगस्त 2027 | नई दिल्ली जैसी ही |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कृष्ण जन्माष्टमी 2027 में कब है?
कृष्ण जन्माष्टमी 2027 बुधवार, 25 अगस्त 2027 को है (नई दिल्ली)। तिथि 8:25 PM, 24 अग॰ से 7:21 PM तक रहती है।
कृष्ण जन्माष्टमी की तारीख हर वर्ष क्यों बदलती है?
कृष्ण जन्माष्टमी हिंदू चंद्र-सौर पंचांग पर आधारित है। यह भाद्रपद (पूर्णिमान्त) · श्रावण (अमान्त) की कृष्ण पक्ष अष्टमी से जुड़ा है, किसी निश्चित अंग्रेज़ी तारीख से नहीं। चंद्र वर्ष सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटा होता है, इसलिए तारीख हर वर्ष लगभग इतनी पहले खिसकती है, जब तक अधिक मास जोड़कर वह वापस आगे नहीं कूदती।
कृष्ण जन्माष्टमी क्या हर जगह एक ही दिन होता है?
जाँचे गए शहरों (नई दिल्ली, लंदन, न्यूयॉर्क, टोरंटो, सिडनी, दुबई, सिंगापुर, जोहान्सबर्ग) में तारीख एक ही है। अन्य स्थानों पर फिर भी अंतर हो सकता है, क्योंकि तिथियाँ स्थानीय सूर्योदय या सूर्यास्त पर देखी जाती हैं।