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रंगों का पर्व, होलिका दहन सहित

होली 2027 की तिथि: सोमवार, 22 मार्च 2027

होली 2027 सोमवार, 22 मार्च 2027 को है, पूर्णिमा (शुक्ल पक्ष), फाल्गुन।

अद्यतन: 4 अक्टू॰ 2026 · तिथियाँ नई दिल्ली के लिए

मुख्य तथ्य

होलिका दहन (संध्या)
रविवार, 21 मार्च 2027
रंगवाली होली
सोमवार, 22 मार्च 2027
हिंदू तिथि
पूर्णिमा (शुक्ल पक्ष)
फाल्गुन
तिथि आरंभ / समाप्त
6:22 PM → 4:14 PM, 22 मार्च
प्रदोष काल
6:33 PM – 8:57 PM
सूर्योदय · सूर्यास्त (नई दिल्ली)
6:23 AM · 6:33 PM
विक्रम संवत्
2083 (गुजराती: 2083)

तिथियाँ

वर्षतारीखहिंदू तिथि
2027सोमवार, 22 मार्च 2027पूर्णिमा (शुक्ल पक्ष)कैलेंडर में देखें

तिथियाँ नई दिल्ली के लिए हैं। बीत चुकी तारीखें नहीं दी गई हैं। आगे के वर्ष जाँच के बाद जोड़े जाएँगे।

होली के बारे में

होली वसंत ऋतु का रंगों का पर्व है। यह दो भागों में मनाई जाती है: फाल्गुन पूर्णिमा की संध्या को होलिका दहन और अगले दिन रंगवाली होली (धुलेंडी), जब लोग रंग-गुलाल लगाते हैं और मिठाइयाँ बाँटते हैं। अग्नि की यह परंपरा प्रह्लाद और होलिका की कथा तथा अहंकार पर भक्ति की विजय की याद दिलाती है।

यह पर्व वसंत के आगमन और शीत ऋतु की फ़सल के अंत का भी संकेत है, और कई स्थानों पर इसके कुछ दिन पहले से होलिका की तैयारी शुरू हो जाती है।

तिथि कैसे तय होती है

होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा की संध्या (प्रदोष) में होता है जब पूर्णिमा हो। पूर्णिमा के पहले आधे भाग में भद्रा (विष्टि करण) रहती है, जिसमें अग्नि नहीं जलाते: यदि भद्रा मध्यरात्रि से पहले समाप्त हो तो उसके बाद दहन होता है, और यदि वह मध्यरात्रि के बाद तक रहे तो भी उसी रात प्रदोष के बाद दहन होता है। रंगवाली होली अगले दिन होती है।

कैसे मनाया जाता है

पूजा विधि

  1. पहले के दिनों में सामूहिक होलिका के लिए लकड़ी और उपले इकट्ठा करने में हाथ बँटाएँ।
  2. होलिका दहन की शाम, सूर्यास्त के बाद के मुहूर्त में होलिका पर जल, रोली, अक्षत, फूल, कच्चा सूत, हल्दी, मूँग, बताशे, नारियल और गेहूँ या जौ की नई बालियाँ अर्पित करें।
  3. होलिका की परिक्रमा करते हुए कच्चा सूत तीन या सात बार लपेटें, और परिवार के लिए प्रार्थना करें।
  4. अग्नि प्रज्वलित होने पर नई बालियाँ उसमें भूनें और प्रसाद के रूप में बाँटें।
  5. अगली सुबह रंगों से होली खेलें (प्राकृतिक रंग त्वचा और पानी के लिए सबसे अच्छे हैं), परिवार और मित्रों से मिलें और गुजिया व मिठाई बाँटें।

पूजा सामग्री सूची

सामान जुटाते हुए टिक करें; आपकी सूची इसी डिवाइस पर रहती है।

कथा: प्रह्लाद और होलिका

असुरराज हिरण्यकशिपु को ऐसा वरदान मिला था कि उसे मारना लगभग असंभव था, और वह स्वयं को भगवान के रूप में पूजे जाने की माँग करता था। पर उसका अपना पुत्र प्रह्लाद केवल विष्णु की भक्ति करता था, और राजा कुछ भी करके उसे बदल न सका।

अंत में राजा की बहन होलिका, जिसके पास अग्नि से न जलने वाली चादर थी, प्रह्लाद को गोद में लेकर जलती चिता में बैठ गई। चादर उड़कर प्रह्लाद पर आ गई; होलिका जल गई और बालक सुरक्षित बाहर आ गया। इसके बाद विष्णु ने नरसिंह रूप में प्रकट होकर हिरण्यकशिपु का अंत किया। होलिका की अग्नि अहंकार पर आस्था की विजय का प्रतीक है।

आरती: ॐ जय जगदीश हरे

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ॐ जय जगदीश हरे॥ जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का, स्वामी दुःख बिनसे मन का। सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय जगदीश हरे॥ मात पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी, स्वामी शरण गहूँ मैं किसकी। तुम बिन और न दूजा, आस करूँ मैं जिसकी॥ ॐ जय जगदीश हरे॥ तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी, स्वामी तुम अन्तर्यामी। पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सब के स्वामी॥ ॐ जय जगदीश हरे॥ तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता, स्वामी तुम पालनकर्ता। मैं सेवक तुम स्वामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय जगदीश हरे॥ तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति, स्वामी सबके प्राणपति। किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय जगदीश हरे॥ दीन-बन्धु दुःख-हर्ता, ठाकुर तुम मेरे, स्वामी रक्षक तुम मेरे। अपने हाथ उठाओ, अपनी शरण लगाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय जगदीश हरे॥ विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा, स्वामी पाप हरो देवा। श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा॥ ॐ जय जगदीश हरे॥

पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी द्वारा 1870 के दशक में रचित, लगभग हर विष्णु पूजा के अंत में गाई जाती है। शब्द परिवारों में थोड़े अलग हो सकते हैं।

अन्य शहरों में होली 2027

शहरतारीखनई दिल्ली से तुलना
नई दिल्लीसोमवार, 22 मार्च 2027नई दिल्ली जैसी ही
लंदनसोमवार, 22 मार्च 2027नई दिल्ली जैसी ही
न्यूयॉर्कसोमवार, 22 मार्च 2027नई दिल्ली जैसी ही
टोरंटोसोमवार, 22 मार्च 2027नई दिल्ली जैसी ही
सिडनीमंगलवार, 23 मार्च 20271 दिन बाद
दुबईसोमवार, 22 मार्च 2027नई दिल्ली जैसी ही
सिंगापुरमंगलवार, 23 मार्च 20271 दिन बाद
जोहान्सबर्गसोमवार, 22 मार्च 2027नई दिल्ली जैसी ही
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

होली 2027 में कब है?

होली 2027 सोमवार, 22 मार्च 2027 को है (नई दिल्ली)। तिथि 6:22 PM से 4:14 PM, 22 मार्च तक रहती है। होलिका दहन एक दिन पहले, रविवार, 21 मार्च 2027 को है।

होली की तारीख हर वर्ष क्यों बदलती है?

होली हिंदू चंद्र-सौर पंचांग पर आधारित है। यह फाल्गुन की पूर्णिमा (शुक्ल पक्ष) से जुड़ा है, किसी निश्चित अंग्रेज़ी तारीख से नहीं। चंद्र वर्ष सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटा होता है, इसलिए तारीख हर वर्ष लगभग इतनी पहले खिसकती है, जब तक अधिक मास जोड़कर वह वापस आगे नहीं कूदती।

होली क्या हर जगह एक ही दिन होता है?

हमेशा नहीं। सिडनी, सिंगापुर में तारीख नई दिल्ली से अलग है, क्योंकि तिथियाँ स्थानीय सूर्योदय या सूर्यास्त पर देखी जाती हैं और ये स्थान भारत से कई घंटे दूर हैं। ऊपर की शहर-सारणी या अपने स्थान के साथ कैलेंडर देखें।

कैलेंडर में देखें। विक्रम संवत् कैलेंडर में मार्च 2027 देखें और अपने सूर्योदय के अनुसार तारीख पाने के लिए शहर बदलें।

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