एकादशी प्रत्येक पक्ष की ग्यारहवीं तिथि है, इसलिए यह महीने में दो बार आती है, एक बार शुक्ल और एक बार कृष्ण पक्ष में। अनेक हिंदू, विशेषकर वैष्णव, एकादशी का व्रत रखते हैं और विष्णु की पूजा करते हैं। वर्ष की 24 एकादशियों में से हर एक का अपना नाम और कथा है।
एकादशी की तिथियाँ 4 अक्टू॰ 2026 से 2027 तक
| तारीख | नाम | मास (पूर्णिमान्त) | तिथि आरंभ → समाप्त (नई दिल्ली) |
|---|---|---|---|
| 6 अक्टू॰ 2026 मंगलवार | इन्दिरा एकादशी | आश्विन | 2:08 AM → 12:35 AM, 7 अक्टू॰ |
| 22 अक्टू॰ 2026 गुरुवार | पापांकुशा एकादशी | आश्विन | 2:12 PM, 21 अक्टू॰ → 2:48 PM |
| 5 नव॰ 2026 गुरुवार | रमा एकादशी | कार्तिक | 11:04 AM, 4 नव॰ → 10:36 AM |
| 4 दिस॰ 2026 शुक्रवार | उत्पन्ना एकादशी | मार्गशीर्ष | 11:04 PM, 3 दिस॰ → 11:45 PM |
| 20 दिस॰ 2026 रविवार | मोक्षदा एकादशी | मार्गशीर्ष | 10:10 PM, 19 दिस॰ → 8:15 PM |
| 3 जन॰ 2027 रविवार | सफला एकादशी | पौष | 2:25 PM, 2 जन॰ → 4:09 PM |
| 19 जन॰ 2027 मंगलवार | पुत्रदा (पौष) एकादशी | पौष | 10:27 AM, 18 जन॰ → 7:50 AM |
| 2 फ़र॰ 2027 मंगलवार | षट्तिला एकादशी | माघ | 8:42 AM, 1 फ़र॰ → 11:11 AM |
| 17 फ़र॰ 2027 बुधवार | जया एकादशी | माघ | 8:20 PM, 16 फ़र॰ → 5:32 PM |
| 3 मार्च 2027 बुधवार | विजया एकादशी | फाल्गुन | 4:45 AM → 7:25 AM, 4 मार्च |
| 4 मार्च 2027 गुरुवार | विजया एकादशी (अगले दिन) | फाल्गुन | 4:45 AM, 3 मार्च → 7:25 AM |
| 18 मार्च 2027 गुरुवार | आमलकी एकादशी | फाल्गुन | 4:22 AM → 1:51 AM, 19 मार्च |
| 2 अप्रै॰ 2027 शुक्रवार | पापमोचनी एकादशी | चैत्र | 12:46 AM → 2:52 AM, 3 अप्रै॰ |
| 17 अप्रै॰ 2027 शनिवार | कामदा एकादशी | चैत्र | 11:22 AM, 16 अप्रै॰ → 9:28 AM |
| 2 मई 2027 रविवार | वरूथिनी एकादशी | वैशाख | 6:54 PM, 1 मई → 7:52 PM |
| 16 मई 2027 रविवार | मोहिनी एकादशी | वैशाख | 6:18 PM, 15 मई → 5:14 PM |
| 1 जून 2027 मंगलवार | अपरा एकादशी | ज्येष्ठ | 10:03 AM, 31 मई → 9:40 AM |
| 14 जून 2027 सोमवार | निर्जला एकादशी | ज्येष्ठ | 2:12 AM → 2:08 AM, 15 जून |
| 30 जून 2027 बुधवार | योगिनी एकादशी | आषाढ़ | 10:05 PM, 29 जून → 8:31 PM |
| 14 जुला॰ 2027 बुधवार | देवशयनी एकादशी | आषाढ़ | 12:09 PM, 13 जुला॰ → 1:11 PM |
| 12 अग॰ 2027 गुरुवार | पुत्रदा (श्रावण) एकादशी | श्रावण | 12:59 AM → 3:00 AM, 13 अग॰ |
| 28 अग॰ 2027 शनिवार | अजा एकादशी | भाद्रपद | 3:26 PM, 27 अग॰ → 12:43 PM |
| 11 सित॰ 2027 शनिवार | परिवर्तिनी एकादशी | भाद्रपद | 5:01 PM, 10 सित॰ → 7:36 PM |
| 26 सित॰ 2027 रविवार | इन्दिरा एकादशी | आश्विन | 10:31 PM, 25 सित॰ → 7:50 PM |
| 11 अक्टू॰ 2027 सोमवार | पापांकुशा एकादशी | आश्विन | 11:41 AM, 10 अक्टू॰ → 2:09 PM |
| 25 अक्टू॰ 2027 सोमवार | रमा एकादशी | कार्तिक | 5:41 AM → 3:23 AM, 26 अक्टू॰ |
| 10 नव॰ 2027 बुधवार | देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी | कार्तिक | 7:35 AM, 9 नव॰ → 9:12 AM |
| 24 नव॰ 2027 बुधवार | उत्पन्ना एकादशी | मार्गशीर्ष | 1:45 PM, 23 नव॰ → 12:12 PM |
| 9 दिस॰ 2027 गुरुवार | मोक्षदा एकादशी | मार्गशीर्ष | 2:59 AM → 3:20 AM, 10 दिस॰ |
| 23 दिस॰ 2027 गुरुवार | सफला एकादशी | पौष | 11:41 PM, 22 दिस॰ → 11:12 PM |
तारीखें नई दिल्ली के लिए हैं और स्थानीय सूर्योदय पर चल रही तिथि पर आधारित हैं। तिथि किसी भी समय शुरू और समाप्त हो सकती है, इसलिए सारणी में उसका आरंभ और अंत भी दिया है। जब एकादशी लगातार दो दिन सूर्योदय पर हो तो दोनों दिखाए गए हैं; दूसरा वह दिन है जब कई वैष्णव परंपराएँ व्रत रखती हैं।
पूजा विधि
- दशमी को, एक दिन पहले, सूर्यास्त से पहले एक बार सादा सात्विक भोजन करें।
- एकादशी को स्नान करके तुलसी दल (एक दिन पहले तोड़ा हुआ, क्योंकि एकादशी को तुलसी नहीं तोड़ी जाती), पीले फूल, पंचामृत और फल से विष्णु की पूजा करें।
- सामर्थ्य के अनुसार व्रत रखें: निर्जला, फल और दूध के साथ, या केवल अन्न और दालें, विशेषकर चावल छोड़कर।
- उस एकादशी की कथा पढ़ें, "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" या विष्णु सहस्रनाम का जाप करें, और संभव हो तो रात्रि जागरण करें।
- द्वादशी को सूर्योदय के बाद, हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) छोड़कर, पारण करें और अन्न दान करें।
पूजा सामग्री सूची
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कथा: एकादशी का जन्म
मुर नामक असुर ने देवताओं को आतंकित कर रखा था, और भगवान विष्णु ने बहुत समय तक उससे युद्ध किया, फिर बद्रिकाश्रम की एक गुफा में विश्राम करने चले गए। जब मुर सोते हुए भगवान पर आक्रमण करने आया, तो विष्णु के शरीर से एक तेजस्वी कन्या प्रकट हुई और उसने मुर का वध कर दिया।
वह एकादशी तिथि थी। प्रसन्न होकर विष्णु ने उसका नाम एकादशी रखा और वर दिया कि जो उसके दिन व्रत रखेगा वह पापों से मुक्त होगा। उसका जन्म उत्पन्ना एकादशी के रूप में मनाया जाता है, और वर्ष की हर एकादशी की अपनी अलग कथा भी है।
आरती: ॐ जय जगदीश हरे
पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी द्वारा 1870 के दशक में रचित, लगभग हर विष्णु पूजा के अंत में गाई जाती है। शब्द परिवारों में थोड़े अलग हो सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अगली एकादशी कब है?
अगली एकादशी मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को है (इन्दिरा एकादशी, नई दिल्ली)।
क्या तारीख शहरों में अलग हो सकती है?
हाँ। तिथियाँ स्थानीय समय (सूर्योदय, या प्रदोष के लिए संध्या) पर देखी जाती हैं, इसलिए भारत से दूर के शहर में वही व्रत एक दिन पहले या बाद में दिख सकता है। सटीक तारीख के लिए अपने शहर के साथ कैलेंडर देखें।