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प्रदोष व्रत की तिथियाँ 2026–2027: पूरी सूची और समय

अगले वर्षों की हर प्रदोष व्रत की तारीख, आरंभ और अंत के समय सहित।

अद्यतन: 4 अक्टू॰ 2026 · तिथियाँ नई दिल्ली के लिए

प्रदोष व्रत प्रत्येक पक्ष की त्रयोदशी तिथि को, महीने में दो बार, शिव की आराधना में रखा जाता है। दिनभर व्रत रखकर सायंकाल प्रदोष काल, यानी सूर्यास्त के बाद की अवधि, में शिव का पूजन किया जाता है। प्रदोष सोमवार को पड़े तो सोम प्रदोष, मंगलवार को भौम प्रदोष और शनिवार को शनि प्रदोष कहलाता है।

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प्रदोष व्रत की तिथियाँ 4 अक्टू॰ 2026 से 2027 तक

तारीखनाममास (पूर्णिमान्त)तिथि आरंभ → समाप्त (नई दिल्ली)
8 अक्टू॰ 2026 गुरुवारप्रदोष व्रत (कृष्ण)आश्विन11:17 PM, 7 अक्टू॰ → 10:16 PM
23 अक्टू॰ 2026 शुक्रवारप्रदोष व्रत (शुक्ल)आश्विन2:36 PM → 1:37 PM, 24 अक्टू॰
6 नव॰ 2026 शुक्रवारप्रदोष व्रत (कृष्ण)कार्तिक10:31 AM → 10:48 AM, 7 नव॰
22 नव॰ 2026 रविवारप्रदोष व्रत (शुक्ल)कार्तिक4:57 AM → 2:37 AM, 23 नव॰
6 दिस॰ 2026 रविवारप्रदोष व्रत (कृष्ण)मार्गशीर्ष12:52 AM → 2:23 AM, 7 दिस॰
21 दिस॰ 2026 सोमवारसोम प्रदोष व्रत (शुक्ल)मार्गशीर्ष5:37 PM → 2:24 PM, 22 दिस॰
4 जन॰ 2027 सोमवारसोम प्रदोष व्रत (कृष्ण)पौष6:16 PM → 8:40 PM, 5 जन॰
5 जन॰ 2027 मंगलवारभौम प्रदोष व्रत (कृष्ण)पौष6:16 PM, 4 जन॰ → 8:40 PM
20 जन॰ 2027 बुधवारप्रदोष व्रत (शुक्ल)पौष4:42 AM → 1:12 AM, 21 जन॰
3 फ़र॰ 2027 बुधवारप्रदोष व्रत (कृष्ण)माघ1:51 PM → 4:32 PM, 4 फ़र॰
18 फ़र॰ 2027 गुरुवारप्रदोष व्रत (शुक्ल)माघ2:28 PM → 11:15 AM, 19 फ़र॰
5 मार्च 2027 शुक्रवारप्रदोष व्रत (कृष्ण)फाल्गुन9:54 AM → 12:04 PM, 6 मार्च
20 मार्च 2027 शनिवारशनि प्रदोष व्रत (शुक्ल)फाल्गुन11:18 PM, 19 मार्च → 8:46 PM
4 अप्रै॰ 2027 रविवारप्रदोष व्रत (कृष्ण)चैत्र4:27 AM → 5:24 AM, 5 अप्रै॰
18 अप्रै॰ 2027 रविवारप्रदोष व्रत (शुक्ल)चैत्र7:42 AM → 6:09 AM, 19 अप्रै॰
3 मई 2027 सोमवारसोम प्रदोष व्रत (कृष्ण)वैशाख8:05 PM → 7:31 PM, 4 मई
17 मई 2027 सोमवारसोम प्रदोष व्रत (शुक्ल)वैशाख4:28 PM → 4:04 PM, 18 मई
2 जून 2027 बुधवारप्रदोष व्रत (कृष्ण)ज्येष्ठ8:29 AM → 6:35 AM, 3 जून
16 जून 2027 बुधवारप्रदोष व्रत (शुक्ल)ज्येष्ठ2:31 AM → 3:21 AM, 17 जून
1 जुला॰ 2027 गुरुवारप्रदोष व्रत (कृष्ण)आषाढ़6:15 PM → 3:24 PM, 2 जुला॰
15 जुला॰ 2027 गुरुवारप्रदोष व्रत (शुक्ल)आषाढ़2:41 PM → 4:35 PM, 16 जुला॰
31 जुला॰ 2027 शनिवारशनि प्रदोष व्रत (कृष्ण)श्रावण2:19 AM → 10:58 PM
14 अग॰ 2027 शनिवारशनि प्रदोष व्रत (शुक्ल)श्रावण5:21 AM → 7:54 AM, 15 अग॰
29 अग॰ 2027 रविवारप्रदोष व्रत (कृष्ण)भाद्रपद9:36 AM → 6:13 AM, 30 अग॰
13 सित॰ 2027 सोमवारसोम प्रदोष व्रत (शुक्ल)भाद्रपद10:13 PM, 12 सित॰ → 12:40 AM, 14 सित॰
27 सित॰ 2027 सोमवारसोम प्रदोष व्रत (कृष्ण)आश्विन4:56 PM → 1:55 PM, 28 सित॰
12 अक्टू॰ 2027 मंगलवारभौम प्रदोष व्रत (शुक्ल)आश्विन4:14 PM → 5:49 PM, 13 अक्टू॰
27 अक्टू॰ 2027 बुधवारप्रदोष व्रत (कृष्ण)कार्तिक1:04 AM → 10:50 PM
11 नव॰ 2027 गुरुवारप्रदोष व्रत (शुक्ल)कार्तिक10:08 AM → 10:21 AM, 12 नव॰
25 नव॰ 2027 गुरुवारप्रदोष व्रत (कृष्ण)मार्गशीर्ष10:51 AM → 9:48 AM, 26 नव॰
11 दिस॰ 2027 शनिवारशनि प्रदोष व्रत (शुक्ल)मार्गशीर्ष2:54 AM → 1:43 AM, 12 दिस॰
25 दिस॰ 2027 शनिवारशनि प्रदोष व्रत (कृष्ण)पौष11:09 PM, 24 दिस॰ → 11:32 PM

तारीखें नई दिल्ली के लिए हैं। प्रदोष व्रत उस दिन रखा जाता है जब सूर्यास्त के बाद संध्या में त्रयोदशी चल रही हो, इसलिए दिखाई गई तिथि-अवधि वही त्रयोदशी है जो उस संध्या को ढके, सूर्योदय की तिथि नहीं।

पूजा विधि

  1. दिन भर फलाहार व्रत रखें।
  2. सूर्यास्त से पहले फिर से स्नान करें।
  3. प्रदोष काल में, सूर्यास्त के आसपास के समय (पृष्ठ पर दिया गया), शिव-पार्वती की पूजा करें: जल, दूध या पंचामृत से अभिषेक, फिर बिल्व पत्र, धतूरा और सफ़ेद फूल।
  4. उस वार की प्रदोष कथा पढ़ें (सोम, भौम और शनि प्रदोष की अपनी कथाएँ हैं)।
  5. "ॐ नमः शिवाय" का 108 बार जाप करें, आरती गाएँ और पूजा के बाद व्रत खोलें।

पूजा सामग्री सूची

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कथा: संध्या में शिव पूजा क्यों

जब देवताओं और असुरों ने क्षीरसागर का मंथन किया, तो सबसे पहले भयंकर विष हलाहल निकला और लोकों को जलाने लगा। शिव जी ने उसे पीकर कंठ में रोक लिया, जिससे उनका कंठ नीला हो गया, और वे नीलकंठ कहलाए।

वह त्रयोदशी की संध्या थी। राहत पाए देवताओं ने उनकी स्तुति की, और शिव जी दिन और रात के बीच आनंद से नृत्य करने लगे। इसीलिए हर त्रयोदशी को प्रदोष काल में उनकी पूजा होती है।

आरती: ॐ जय शिव ओंकारा

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ एकानन चतुरानन पंचानन राजे। हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे। त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी। चन्दन मृगमद सोहै भाले शशिधारी॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे। सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ कर के मध्य कमण्डलु चक्र त्रिशूलधारी। सुखकारी दुखहारी जगपालन कारी॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका। प्रणवाक्षर में शोभित ये तीनों एका॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥ त्रिगुणस्वामी जी की आरती जो कोइ नर गावे। कहत शिवानन्द स्वामी सुख संपति पावे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥

सबसे अधिक गाई जाने वाली शिव आरती, स्वामी शिवानंद की रचना मानी जाती है। शब्द परिवारों में थोड़े अलग हो सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अगली प्रदोष व्रत कब है?

अगली प्रदोष व्रत गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को है (प्रदोष व्रत (कृष्ण), नई दिल्ली)।

क्या तारीख शहरों में अलग हो सकती है?

हाँ। तिथियाँ स्थानीय समय (सूर्योदय, या प्रदोष के लिए संध्या) पर देखी जाती हैं, इसलिए भारत से दूर के शहर में वही व्रत एक दिन पहले या बाद में दिख सकता है। सटीक तारीख के लिए अपने शहर के साथ कैलेंडर देखें।

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